नदी महोत्सव के निष्कर्ष को लागू करेगी सरकार

आशीष बिल्लौरे
होशंगाबाद. अंतरराष्ट्रीय नदी महोत्सव के निष्कर्ष को राज्य सरकार चरणबद्ध ढंग से लागू करेगी। नदियों को प्रदूषण से बचाने के लिए हर संभव प्रयास होंगे। यह बात मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार को यहां नदी महोत्सव के शुभारंभ अवसर पर कही।

नर्मदा-तवा संगम पर बांद्राभान में नर्मदा समग्र द्वारा तीन दिवसीय महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में देश-विदेश के 500 से अधिक विशेषज्ञ और शोधार्थी शामिल हुए हैं। कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि नदियों का हमारे जीवन में खास महत्व है।

नर्मदा तट से लगे ग्रामीण क्षेत्रों में नर्मदा को मां के समान पूजा जाता है। उन्होंने कहा कि नर्मदा परिक्रमा पथ को विकसित करने के लिए प्रदेश सरकार खास प्रयास कर रही है। परिक्रमा पथ में पुल-पुलिया तथा विश्रामगृह आदि का चरणबद्ध रूप से निर्माण कराया जाएगा।

उद्घाटन सत्र में गांधी शांति प्रतिष्ठान के कार्यकर्ता व पर्यावरणविद् अनुपम मिश्र ने कहा कि नर्मदा का शाब्दिक अर्थ नर्मदा यानी आनंद प्रदान करने वाला होता है। नर्मदा पिछले 30 लाख वर्र्षो से प्रवाहित है और आनंद प्रदान कर रही है। उपभोक्तावाद के इस युग में हमने नदी को मां के स्थान पर दासी समझ लिया है। हम नदियों से अपेक्षा रखते हैं कि वह हमारे खेतों के लिए पानी दे, बिजली बनाए और हमें पीने का पानी दे।

बदले में हम तमाम कूड़ा करकट इसमें डालकर आसपास की सफाई कर लें। इस सोच ने नदियों को प्रदूषित कर रखा है। यदि हमें नदियों को बचाना है तो इसकी पवित्रता बनाए रखनी होगी। प्रख्यात साहित्यकार अमृतलाल बेगड़ ने अपनी रोचक शैली में कहा कि पानी के तीन प्रमुख गुण होते हैं। पहला यह भगवान की तरह अवतरित होता है। आकाश में यह बादलों के रूप में धरती पर नदियों, समुद्रों के रूप में तथा जमीन के नीचे पाताल में भू-गर्भ जल के रूप में होता है। दूसरा पानी महारास रचाता है। पानी का वाष्पीकरण होता है।

हवाओं के साथ मिलकर यह दूर-दूर की यात्रा करता है और फिर वर्षा के रूप में बरस जाता है। नदियों की धारों को रोककर हम इन्हें विनाश की ओर धकेल रहे हैं। इस महोत्सव में हम सभी को ऐसे ही विषयों पर चर्चा करनी है।

अंतरराष्ट्रीय नदी महोत्सव के सूत्रधार अनिल माधव दवे ने कहा कि नदी को जीवमान इकाई के रूप में मानना चाहिए। नदी को जो लोग ‘वाटर बाडी’ मानते हैं उन्हें यह समझना चाहिए कि नदी का अपना जीवन है और वह जीवन देती है। कार्यक्रम में महिला बाल विकास मंत्री कुसुम महदेले, चिंतक गोविंदाचार्य, सांसद सरताज सिंह, रामपाल सिंह, विधायक मधुकर हण्रे, गिरिजाशंकर शर्मा, पापुनि अध्यक्ष विजयपाल सिंह, भंडार गृह निगम अध्यक्ष राजेंद्र सिंह, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अध्यक्ष एससी गौतम, राजेश गुप्ता, कमिश्नर पुखराज मारू, आईजी प्रदीप रूणवाल, कलेक्टर जीपी तिवारी, एसपी एसके सक्सेना सहित देश-विदेश से आए पर्यावरणविद् और शोधार्थी मौजूद थे।

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